

बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में प्रसूता महिलाओं की बिगड़ी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बीच “बीकानेर बचाओ संघर्ष समिति” ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और प्रभावित महिलाओं के बेहतर इलाज की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ बच्चियों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनकी जान बचाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों की लापरवाही के कारण मरीजों की किडनियां प्रभावित हुई हैं। समिति ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी चिकित्सक की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
समिति ने यह भी कहा कि मामले को लेकर कई भ्रामक जानकारियां फैलाई गई हैं। कई मरीजों का सामान्य प्रसव हुआ था, जबकि बाहर यह प्रचारित किया जा रहा है कि सी-सेक्शन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी।
पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए समिति ने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित दवाइयों में से केवल 5 से 10 प्रतिशत दवाइयां ही अस्पताल में उपलब्ध हैं। गरीब मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल स्टोरों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
समिति ने जांच व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि मरीज को जांच के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना है कि जिस दिन डॉक्टर जांच लिखे, उसी दिन जांच और रिपोर्ट उपलब्ध होनी चाहिए ताकि मरीज को समय पर उपचार मिल सके।
इसके अलावा अस्पताल में भ्रष्टाचार, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग शुल्क, फोटोकॉपी सेवाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग भी उठाई गई। समिति का आरोप है कि अस्पताल परिसर में पीने के पानी, कूलर, पंखों और आईसीयू के एसी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
संघर्ष समिति ने पांच वर्ष पूर्व तैयार महिला विंग को तत्काल शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि यदि यह सुविधा पहले शुरू हो जाती तो लेबर रूम में उत्पन्न हुई कई समस्याओं से बचा जा सकता था।
समिति ने घोषणा की कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहेगा और गांधीवादी तरीके से चलाया जाएगा। प्रतिनिधियों ने लोगों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि पीबीएम अस्पताल में सुधार और मरीजों के अधिकारों के लिए संघर्ष अंतिम सांस तक जारी
