

गुरुपूर्णिमा पर हाथीरामजी मठ में हुआ गुरुपूजन परंपरा का निर्वहन, साधुओं शिष्यों ने ग्रहण किया पंगत प्रसाद भेंट
तिरुमला। गुरु इस ब्रह्माण्ड की पावन धारणा है। गुरु को कभी बनाया नहीं जाता बल्कि गुरु धारण किया जाता है। यह कहा हाथीरामजी मठ के महंत पूज्य गुरुदेव 1008 स्वामीश्री अर्जुनदास जी महाराज ने। वे यहां गुरु पुर्णिमा के पावन पुनीत अवसर पर विधिवत् स्वयं गुरु पूजन करने के बाद उपस्थित श्रद्धालु शिष्यों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु द्वारा बताए गए सेवा मार्ग पर चलना ही असल में गुरु आज्ञा का पालन होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान का सदैव सम्मान करना चाहिए और निरंतर सीखने के लिए जिज्ञासु बने रहना चाहिए। जीवन में अच्छे मूल्यों को अपनाने एवं दान धर्म के लिए प्रेरित करते हुए वे बोले कि चारों युगों से चली आ रही दान की परम्परा की कलयुग में भी सर्वथा महत्ता है। इससे पूर्व उन्होंने पूर्व गादीपति अपने गुरु भगवान एवं पूज्य हाथीरामजी की गद्दी के समक्ष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना भोग अर्पण कर आरती की। साथ ही उपस्थित बड़ी संख्या में साधु संतों आदि को वस्त्र, प्रसाद फल दक्षिणा आदि भेंट की। इस दौरान अनेक राज्यों से आये शिष्यों भक्तों ने भी परम गुरुभक्त शिव नारायणदासजी व प्रमोददासजी महाराज के साथ गुरुपूजन में भाग लिया। सभी ने पंगत भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर महंत जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
