टिकट कटने से बढ़ी नाराजगी, निर्दलीयों ने खोला मोर्चा;

बीकानेर राजस्थान
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बीकानेर निकाय चुनाव में बागियों ने बढ़ाई सियासी हलचल

 

 

वार्ड 28 में निर्दलीय उम्मीदवार मंजू बोथरा,

वार्ड 32 में निर्दलीय उम्मीदवार भगवती प्रसाद गोड़ 

वार्ड नंबर 51 से त्रिलोक सिंह चौहान इत्यादि अन्य भाजपा के बागी प्रत्याशीयों के तेवर से क्या पार्टी को होगा नुकसान क्या बदलेंगे समीकरण 

वहीं दूसरी तरफ जीन प्रत्याशियों को पार्टी का सिंबल मिला उनके चेहरे पर खिली मुस्कान  

वार्ड 29 में भंवरलाल साहू ने जताया जनता पर भरोसा; पिछले कार्यकाल मे कुछ छूटेगा हुवे सड़कों के कार्य जल निकासी और वार्ड में होंगे अन्य विकास कार्य 

 

 

अनुशासित वाणी न्यूज़.बीकानेर 2026। राजस्थान में होने जा रहे नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बीकानेर में राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों में टिकट वितरण के बाद सामने आए असंतोष ने चुनावी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है। कई दावेदारों और पार्टी कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। ऐसे में कई वार्डों में अब मुकाबला सीधे तौर पर पार्टी प्रत्याशी बनाम पार्टी के ही असंतुष्ट चेहरे के बीच दिखाई देने लगा है।

टिकट वितरण से उपजे असंतोष के बीच पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद टिकट वितरण में उनकी उपेक्षा हुई। यही नाराजगी अब निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के रूप में सामने आ रही है।

2018 के लोकसभा चुनाव में त्रिलोक सिंह चौहान ने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने में निभाई अहम भूमिका

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा से लंबे समय से जुड़े रहे त्रिलोक सिंह चौहान का नाम भी चर्चा में है। चौहान भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियों पर रह चुके हैं और भाजपा बीकानेर शहर के कई जिम्मेदारी वाले पदों की जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।  पंडित दीनदयाल उपाध्याय की शहर कार्यकारिणी में अध्यक्ष पद में भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष पद पर और प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प से सिद्धि नवभारत के निर्माण मे जिला संयोजक के रूप में कार्य कर चुके हैं

जैसा की उनका यह कहना है कि उन्होंने पूर्व में पार्टी संगठन के साथ-साथ चुनाव अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

पिछले 2018 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अर्जुन राम मेघवाल के पक्ष में चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही। उस समय पार्टी के भीतर टिकट और अन्य कारणों से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को वापस पार्टी के पक्ष में लाने के लिए भी प्रयास किए गए।

बताया जाता है कि उस दौरान बीकानेर लोक सभा चुनाव के प्रस्तावक के रूप में मोहन बेदी सहित अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर विभिन्न वार्डों में असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से संपर्क किया गया और उन्हें पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए मनाने का प्रयास किया गया। जिसमें उनकी टीम पूर्णता सफल भी रही और लोकसभा चुनाव में लाखों मतों की रिकॉर्ड विजय श्री दिलाने में सफल भी रहे

राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद इस बार टिकट वितरण के दौरान स्वयं चौहान को टिकट नहीं मिलने से पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चौहान की उम्र भी आने वाले समय में चुनाव न लड़ने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कारक बन सकती है। ऐसे में उनके समर्थकों के बीच टिकट नहीं मिलने को लेकर नाराजगी चर्चा का विषय बनी हुई है।

दूसरी तरफ एक महत्वपूर्ण कारण चौहान की नाराजगी का यह भी बताया जाता है कि उनके वार्ड से पिछले नगर निगम के चुनाव में भाजपा से टिकट न मिलने पर  पार्टी के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार उम्मीदवार बनाकर  भाजपा के पार्षद को हराने में अहम भूमिका निभाई आज पार्टी ने उसी को अपने चुनाव चिन्ह देखकर के पार्टी के असली हकदार कार्य करता के मन में उन्माद पैदा किया है, जिससे चौहान को निराशा हुई है

हालांकि टिकट वितरण को लेकर पार्टी के स्तर पर अलग-अलग दावेदारों और कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति दिखाई दे रही है। यही कारण है कि कई वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के सामने पुराने कार्यकर्ता अथवा स्थानीय प्रभाव रखने वाले चेहरे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए हैं।

प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के के कारण नामांकन के दौरान  प्रत्याशियों को करना पड़ा परेशानियां का सामना

नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी कई स्थानों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों की भीड़ देखने को मिली। प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान कुछ स्थानों पर प्रत्याशियों और समर्थकों की आवाजाही तथा अव्यवस्थाओं को लेकर पुलिस और लोगों के बीच नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली।

प्रशासन का प्रयास नामांकन प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न करवाने का रहा। कम समय और बड़ी संख्या में प्रत्याशियों और समर्थकों के पहुंचने के कारण कई जगह भीड़ और अव्यवस्था जैसी स्थिति बनी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रत्याशीयो के बीच नोक झोक देखने को भी मिली

इन घटनाओं ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि चुनावी माहौल अब पूरी तरह गर्म हो चुका है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने वाली हैं।

वार्ड 28 : मंजू बोथरा ने निर्दलीय चुनाव का जताया इरादा

गंगाशहर के वार्ड नंबर 28 से बोथरा चौक प्रथम से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल करके  मंजू बोथरा ने चुनावी मैदान में  राजनीतिक मुकाबले को रोचक बना दिया है। गृहस्थी संभालने के साथ सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रही मंजू बोथरा का कहना है कि जनता की सेवा करने की इच्छा उन्हें राजनीति के मैदान में लेकर आई है।

महिलाओं से लगातार संपर्क में रहने वाली मंजू बोथरा ने कहा कि वार्ड की महिलाओं की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाया जाएगा। उनका कहना है कि क्षेत्र में गंदगी, नालियों की सफाई, कचरा, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है।

उन्होंने वार्ड में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की इच्छा भी जताई। उनका कहना है कि यदि जनता उन्हें अवसर देती है तो महिलाओं और वार्ड के विकास से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता से काम किया जाएगा।

वार्ड 29 : 60 प्रतिशत सड़कें बनवाईं, बाकी 40 प्रतिशत पूरा करना लक्ष्य—भंवरलाल साहू

गंगाशहर की चौधरी कॉलोनी स्थित वार्ड नंबर 29 से पार्षद पद के प्रत्याशी भंवरलाल साहू ने अपने पूर्व कार्यकाल में करवाए गए विकास कार्यों को जनता के सामने रखते हुए शेष कार्यों को पूरा करवाने का संकल्प जताया है।

साहू के अनुसार वार्ड में लगभग 60 प्रतिशत सड़कों का निर्माण विभिन्न मदों से करवाया जा चुका है। इनमें नगर निगम, UIT, विधायक कोटा, PWD तथा सांसद कोटे से करवाए गए कार्य शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि सीवरेज लाइन डालने के दौरान कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं, जिन्हें दोबारा बनवाने के लिए प्रयास किए गए। अब वार्ड की शेष लगभग 40 प्रतिशत कच्ची सड़कों और गलियों का निर्माण करवाना उनकी प्राथमिकता है।

साहू ने पेयजल व्यवस्था के लिए वसंत कुंज कॉलोनी में 18 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी बनवाने, आयुष्मान आरोग्य मंदिर शुरू करवाने तथा सरकारी स्कूल खुलवाने जैसे कार्यों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि सरकारी भवन उपलब्ध होने से पहले स्कूल के संचालन के लिए उन्होंने अपने घर में दो वर्षों तक निशुल्क स्थान उपलब्ध करवाया। इसी तरह पशु चिकित्सा सुविधा के लिए पशु अस्पताल खुलवाने तथा अतिरिक्त आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन के लिए भी अपने घर में निशुल्क स्थान उपलब्ध करवाने की बात उन्होंने कही।

साहू का कहना है कि यदि जनता उन्हें दोबारा अवसर देती है तो वार्ड की शेष सड़कों का निर्माण उनकी पहली प्राथमिकताओं में रहेगा।

वार्ड 32 : भगवती प्रसाद गौर फिर मैदान में, जल निकासी को बताया सबसे बड़ा मुद्दा

वार्ड नंबर 32 में पूर्व नगर निगम पार्षद भगवती प्रसाद गौर ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया है।

गोड़ ने बताया कि वे वर्ष 2014 में भाजपा से नगर निगम पार्षद रहे। वर्ष 2018 में टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। इस बार भी पार्टी टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

गोड़ ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से वे लगातार वार्ड की जनता के सुख-दुख में साथ रहे हैं और यही उनका सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने कहा कि देवी सिंह भाटी उनके गुरु हैं, लेकिन चुनाव में उनका सबसे बड़ा भरोसा वार्ड की जनता पर है।

जल निकासी और स्वच्छता सबसे बड़ी प्राथमिकता

भगवती प्रसाद गोड़ ने वार्ड में जल निकासी की समस्या को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में पानी जमा हो जाता है। यदि जनता ने उन्हें अवसर दिया तो जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

उन्होंने स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी काम करने की बात कही।

गोड़ ने अपने पूर्व कार्यकाल में लगभग 18.5 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए जाने का दावा किया। इनमें सड़क, पानी, सीवरेज और पानी की टंकी सहित विभिन्न विकास कार्य शामिल बताए गए।

उन्होंने यह भी कहा कि टिकट वितरण को लेकर कई दावेदारों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है और इसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

हालांकि भाजपा बोर्ड बनने की स्थिति में समर्थन देने का संकेत देते हुए गोड़ ने कहा कि उनका संघर्ष स्थानीय स्तर पर जनता के मुद्दों और वार्ड के विकास के लिए है।

महापौर सुशीला कंवर ने गिनाईं उपलब्धियां, भाजपा बोर्ड बनने का जताया भरोसा

इधर बीकानेर शहर की पूर्व महापौर सुशीला कंवर ने भी अपने कार्यकाल के विकास कार्यों को जनता के सामने रखते हुए दोबारा समर्थन की अपील की है।

उन्होंने अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में इंद्र कॉलोनी की मुख्य सड़क का चौड़ीकरण बताया। उनके अनुसार पहले करीब 10 से 15 फीट चौड़ी सड़क को लगभग 60 फीट तक चौड़ा किया गया।

उन्होंने स्ट्रीट लाइट, हाईमास्ट लाइट, सीवरेज व्यवस्था, अमृत योजना के कार्य, एमआरएस सेंटर, एसटीपी सेंटर और अग्निशमन केंद्रों सहित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख किया।

महापौर ने कहा कि उनके कार्यकाल में सभी पार्षदों को समान रूप से बजट उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया और विकास कार्यों में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया।

उन्होंने वार्डवासियों से एक बार फिर आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि यदि कोई कमी रह गई है तो उसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही डिजिटल वार्ड और डिजिटल बोर्ड की दिशा में काम करने की बात भी कही।

भाजपा के बोर्ड को लेकर उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी के बड़ी संख्या में पार्षद जीतकर आएंगे और बीकानेर में भाजपा का बोर्ड बनेगा।

अब जनता के फैसले पर टिकी निगाहें

बीकानेर नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद जिस तरह भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों में असंतोष सामने आया है, उसने चुनावी मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। कई पुराने कार्यकर्ता और स्थानीय चेहरे अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।

एक ओर जहां राजनीतिक दल अपने अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्दलीय उम्मीदवार अपने व्यक्तिगत संपर्क, पुराने जनाधार और वार्ड स्तर पर किए गए कार्यों के आधार पर मतदाताओं का समर्थन मांग रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक ताकत भारी पड़ती है या फिर स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, पुराने संबंध और वार्ड के मुद्दे चुनावी नतीजों की दिशा तय करते हैं।

बीकानेर के इन वार्डों में चुनावी मुकाबला अब केवल पार्टी बनाम पार्टी नहीं रह गया है, बल्कि कई जगह पुराने कार्यकर्ता बनाम अधिकृत प्रत्याशी का मुकाबला भी दिखाई देने लगा है। अंतिम फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है।