विदा होकर भी रोशनी की उम्मीद दे गईं विमला मेहरा,

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निधन के बाद पीबीएम अस्पताल में हुआ नेत्रदान, शोक के बीच परिवार ने दिया मानव सेवा का संदेश

 

दिनांक 5 नवंबर, बीकानेर। जीवन के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला लाने की भावना को साकार करते हुए चिड़ावा, झुंझुनू निवासी श्रीमती विमला मेहरा का मरणोपरांत नेत्रदान किया गया। श्री सिद्धार्थ मेहरा की धर्मपत्नी विमला मेहरा का 4 नवंबर 2026 को निधन हो गया था। उनकी इच्छा और संकल्प का सम्मान करते हुए परिजनों ने पीबीएम अस्पताल में नेत्रदान करवाया।

 

परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विमला मेहरा ने अपने जीवनकाल में नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की थी। उनके निधन के बाद परिवार ने गहरे दुःख के बीच इस संकल्प को पूरा करने का निर्णय लिया। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के नेत्र विज्ञान विभाग से संबद्ध पटेल नेत्र कोष के स्वीकृति पत्र में उनकी पुत्री डॉ. मनीषा मेहरा ने अपनी माता के नेत्रदान की सहमति दी। इस निर्णय से जरूरतमंदों के जीवन में दृष्टि की नई उम्मीद जगी है।

 

बेटियों और परिवार ने निभाई जिम्मेदारी

 

विमला मेहरा की बड़ी पुत्री डॉ. मनीषा मेहरा, पत्नी डॉ. ओमप्रकाश सिंह, बीकानेर स्थित राजुवास कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। छोटी पुत्री डॉ. शशि मेहरा, पत्नी डॉ. सुरेन्द्र कुमार, सीकर में कार्यरत हैं। परिवार ने विमला मेहरा की अंतिम इच्छा को सम्मान देते हुए नेत्रदान के माध्यम से समाज के सामने संवेदनशीलता और सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया।

 

पारिवारिक दुःख के बीच मानवता के प्रति समर्पण

 

परिवार लगभग दस वर्ष पूर्व अपने पुत्र इंजीनियर शिवनाथ मेहरा को सड़क दुर्घटना में खो चुका है। इस गहरे पारिवारिक आघात के बावजूद विमला मेहरा का नेत्रदान का संकल्प और उसे पूरा करने का परिजनों का निर्णय मानवीय संवेदनाओं के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

 

विमला मेहरा का नेत्रदान समाज को यह प्रेरणा देता है कि किसी प्रियजन की स्मृति को मानव सेवा के माध्यम से भी जीवित रखा जा सकता है। उनका यह संकल्प नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अन्य परिवारों को प्रेरित करने का संदेश है।