बीकानेर, 09 मई।
विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के बाल रोग विभाग एवं थैलेसीमिया सोसायटी, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में पीबीएम चिल्ड्रन हॉस्पिटल स्थित थैलेसीमिया सेमिनार हॉल में जागरूकता शिविर एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के अभिभावकों, चिकित्सकों एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता थैलेसीमिया सोसायटी के अध्यक्ष एवं एस.पी. मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. जी.एस. तंवर ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक रोग है, लेकिन समय रहते जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर इस बीमारी को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि विवाह पूर्व रक्त जांच करवाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
डॉ. तंवर ने कहा कि “मिशन थैलेसीमिया फ्री इंडिया 2035” को सफल बनाने के लिए युवाओं में थैलेसीमिया कैरियर जांच के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। यदि विवाह से पूर्व युवक-युवती की जांच अनिवार्य रूप से की जाए तो थैलेसीमिया मेजर बच्चों के जन्म को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। उन्होंने समाज, चिकित्सकों, शिक्षण संस्थानों एवं सरकार से संयुक्त रूप से जन-जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
जोधपुर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अमर सिंह ने थैलेसीमिया मरीजों में आयरन ओवरलोड की समस्या एवं उसके उपचार पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर चीलेशन थेरेपी शुरू करने से मरीजों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
वहीं डॉ. श्याम अग्रवाल ने थैलेसीमिया उपचार की आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए ‘हैप्लो-मैच स्टेम सेल ट्रांसप्लांट’ पद्धति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब पूर्ण रूप से मैच करने वाले डोनर के अभाव में भी माता-पिता के 50 प्रतिशत मैच के आधार पर बच्चों का सफल उपचार संभव हो रहा है।
बाल रोग विभाग के डॉ. पवन दाड़ा ने थैलेसीमिया रोग की प्रकृति, उसके प्रभाव एवं देखभाल संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में अभिभावकों को समझाई।
कार्यक्रम के अंत में थैलेसीमिया सोसायटी के सचिव तरुण गहलोत ने सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों, अतिथियों एवं उपस्थित अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए समाज से थैलेसीमिया उन्मूलन अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
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थैलेसीमिया भारत के लिए एक गंभीर आनुवंशिक चुनौती है, लेकिन समय रहते जागरूकता और सही कदम उठाकर इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। ‘मिशन थैलेसीमिया फ्री इंडिया 2035’ को सफल बनाने के लिए विवाह पूर्व रक्त जांच (Premarital Blood Screening) अत्यंत आवश्यक है।
यदि विवाह से पहले युवक-युवती की थैलेसीमिया कैरियर जांच अनिवार्य रूप से की जाए, तो दो कैरियर व्यक्तियों के विवाह से होने वाले थैलेसीमिया मेजर बच्चों को रोका जा सकता है। यही थैलेसीमिया उन्मूलन का सबसे प्रभावी, सरल और वैज्ञानिक उपाय है।
समाज, चिकित्सकों, शिक्षण संस्थानों एवं सरकार को मिलकर जन-जागरूकता अभियान चलाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ी को थैलेसीमिया मुक्त भारत का सुरक्षित भविष्य दिया जा सके।”
— प्रो. डॉ. जी.एस. तंवर
अध्यक्ष, थैलेसीमिया सोसायटी, बीकानेर
विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग
एस.पी. मेडिकल कॉलेज, बीकानेर
