


बीकानेर,19अगस्त 26।गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर बुधवार को बीकानेर के हृदय स्थल तुलसी सर्किल पर उनकी मूर्ति पर सरजू दास जी महाराज के द्वारा माल्या अर्पण और दीपक प्रज्वलित करके जयंती मनाई गई। इस समय यहां पर धार्मिक एवं सामाजिक श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। संत-महात्माओं, सनातन संस्कृति से जुड़े श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों ने तुलसीदास जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर सरयू पारिणा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी केवल एक संत या कवि नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, रामभक्ति और लोक चेतना के ऐसे महान संत हैं, जिन्होंने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम की मर्यादा और भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया। वहीं कार्यक्रम के दौरान मेरा बीकानेर मेरा गौरव के अध्यक्ष त्रिलोक सिंह चौहान ने जोकि 2 दिन से अपनी टीम के साथियो के साथ मूर्ति और सर्कल की स्वच्छता पर कार्य कर रहे हैं उनके साथी सहयोगियों ने भी कहा कि हम लगभग 3 वर्षों से इस सर्कल की दुर्दशा पर प्रशासन को आए दिन ज्ञापन देते हैं लेकिन किसी ने भी सुनाई नहीं इसी क्रम में विजय शंकर पाठक संयोजक युवा मोर्चा सदस्य ने भी अपने वक्तव्य रखा और इस दौरान इन सभी का प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश देखा गया और उनकी टीम की तुलसी सर्किल की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन और नगर विकास से जुड़े विभागों के प्रति गहरी नाराजगी भी सामने आई। उनकी टीम और वहां के सीनियर सिटीजन समाज के लोगों का कहना था कि आज देश-विदेश में रामचरितमानस और तुलसीदास जी के साहित्य पर अध्ययन एवं शोध हो रहा है, ऐसे में बीकानेर शहर के प्रमुख स्थान पर स्थापित तुलसीदास जी की प्रतिमा और सर्किल की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरजू दास जी महाराज ने कहा कि तुलसीदास जयंती केवल एक दिन का उत्सव बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि संत तुलसीदास जी के जीवन, साहित्य और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाना चाहिए।

‘प्रतिमा केवल मूर्ति नहीं, हमारी आस्था और सनातन संस्कृति का प्रतीक’
कार्यक्रम में संत-महात्माओं ने कहा कि तुलसीदास जी की प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की प्रतिमा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों सनातन प्रेमियों की आस्था, श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की पहचान का प्रतीक है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया और हनुमान चालीसा सहित अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित की, जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है।
प्रमुख वक्ताओं में सत्य प्रकाश मिश्रा जोगेंद्र श्रीमाली, योगेश पांडे, उमाशंकर दुबे, ओम प्रकाश शर्मा, जानकी दास मारू प्रदीप कुमार पांडे, रविकांत पांडे, श्याम सुंदर पारीक, हुकुमचंद सुथार, बजरंग सुथार,ओमप्रकाश शर्मा, और मातृशक्ति के रूप में उपस्थित सीता देवी,किरण शर्मा आदि ने भी विचार रखे और तुलसी जयंती के अवसर पर मूर्ति पर माला अर्पण की और आरती की, अन्य वक्ताओं ने भी अपने अपने विचार रखे और कहा कि हमें केवल तुलसीदास जयंती के दिन यहां एकत्रित होने के बजाय पूरे वर्ष तुलसीदास जी के विचारों और साहित्य से जुड़ना चाहिए। घर-घर में रामचरितमानस और सुंदरकांड का पाठ हो रहा है, यह तुलसीदास जी की सबसे बड़ी देन है।
तुलसी सर्किल के सौंदर्यकरण की उठी पुरजोर मांग
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों और श्रद्धालुओं ने तुलसी सर्किल की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई। लोगों ने बताया कि सर्किल की टाइल्स जगह-जगह से टूट चुकी हैं, साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, पानी सहित मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और पूरे परिसर का स्वरूप जर्जर होता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों द्वारा पूर्व में भी संबंधित विभागों एवं प्रशासन को सर्किल के विकास और सौंदर्यकरण को लेकर ज्ञापन दिए जाने की बात कही गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
लोगों का कहना था कि यह स्थान शहर के अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। इसके आसपास कलेक्ट्रेट कार्यालय, कर भवन, मॉडर्न मार्केट और तुलसीदास जी सत्संग भवन जैसे प्रमुख स्थल हैं। इसके बावजूद तुलसीदास जी की प्रतिमा वाला सर्किल उपेक्षा का शिकार होना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
‘सिर्फ बीकानेर का नहीं, संतों से जुड़े स्थानों का भी हो विकास’
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बीकानेर के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की कि शहर के विकास के साथ-साथ उन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, जो बीकानेर की सनातन पहचान से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि तुलसी सर्किल का समुचित विकास, सौंदर्यकरण, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। इसके लिए केवल सरकार या प्रशासन की ओर देखने के बजाय समाज को भी तन, मन और समय से सहयोग करना चाहिए।
तुलसीदास जी और स्वामी विवेकानंद के योगदान को किया याद
वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास जी और स्वामी विवेकानंद के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों महापुरुषों ने भारतीय संस्कृति को अलग-अलग माध्यमों से विश्व और समाज के सामने स्थापित किया। स्वामी विवेकानंद ने विदेशों में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति का संदेश पहुंचाया, वहीं तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम की कथा को जन-जन के हृदय तक पहुंचाया।
वक्ताओं ने कहा कि तुलसीदास जी का साहित्य केवल इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के हृदय में जीवित है। इसलिए उनके नाम से जुड़े स्थलों का संरक्षण और विकास समाज तथा प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अगली तुलसी जयंती तक विकास का संकल्प
कार्यक्रम में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि अगली तुलसीदास जयंती तक तुलसी सर्किल के विकास और सौंदर्यकरण के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के सहयोग से सर्किल को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में पहल की जाएगी।
वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज अपने संतों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आए तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। तुलसीदास जी के चरणों में नमन करते हुए कार्यक्रम में ‘जय सियाराम’, ‘बाबा तुलसीदास जी महाराज की जय’ और ‘संत श्री हनुमान जी महाराज की जय’ के जयघोष गूंजे।
स्थानीय नागरिकों मे नवनीत कुमार, सुरेश कुमार पुरोहित, मिलिंद तिवारी, नारायण दास पुरोहित, मीना लाल व्यास, अनिल कुमार तिवारी, श्रीकांत ओझा, हरिकिशन पाठी,योगेश पांडे, नरेश पुरोहित, बाबूलाल भंवर पुरोहित, महेंद्र चुरा,इत्यादि ने प्रशासन से मांग की है कि तुलसी सर्किल के सौंदर्यकरण और विकास की ठोस कार्ययोजना बनाकर शीघ्र काम शुरू किया जाए, ताकि आने वाले समय में यह स्थल बीकानेर की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का सुंदर एवं गरिमामय केंद्र बन सके।
