

पीबीएम अस्पताल में हाई रिस्क गर्भवती को चढ़ाया गया रक्त, अब स्वस्थ होकर लौटी घर

समय पर एचआरपी पहचान, त्वरित रेफरल, संसाधन मैपिंग एवं समन्वित उपचार बना मूल मंत्र
बीकानेर, 26 जुलाई। राज्य सरकार की प्रसव सखी योजना उच्च जोखिम गर्भवतियों के लिए भरोसे का माध्यम बन रही है। बीकानेर जिले के पांचू ब्लॉक के बंधाला गांव की 34 वर्षीय सुमित्रा, पत्नी चेनाराम इसका जीवंत उदाहरण बनी है। पीबीएम अस्पताल में प्रसव सखी की सक्रिय सहायता, त्वरित चिकित्सकीय परामर्श और समय पर उपचार से गंभीर एनीमिया से जूझ रही सुमित्रा अब स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुकी है। वर्तमान में उसका हीमोग्लोबिन 6 ग्राम से बढ़कर 8.3 ग्राम हो गया है तथा अगले माह में संभावित प्रसव तक स्वास्थ्य विभाग उसकी नियमित निगरानी कर रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा उच्च जोखिम गर्भवतियों की समय पर पहचान कर उन्हें एक स्वास्थ्यकर्मी, एक रेफरल संस्थान, एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल तथा एक एम्बुलेंस से जोड़ने की विशेष कार्ययोजना लागू की गई है। इसी क्रम में भादला की एएनएम मीनाक्षी रंगा ने नियमित प्रसव पूर्व जांच के दौरान सुमित्रा को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के रूप में चिन्हित किया। जांच में उसका हीमोग्लोबिन लगातार घटकर 6 ग्राम रह गया था। इसके अलावा वह तीसरी बार गर्भवती थी, उसकी आयु 34 वर्ष थी, वजन 42 किलो तथा उसे पीलिया, थायराइड, कैल्शियम की कमी एवं कम वजन जैसी समस्याएं भी थीं।
जोखिम की पहचान होते ही एएनएम मीनाक्षी रंगा स्वयं गर्भवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पांचू लेकर पहुंचीं, जहां चिकित्सक डॉ. नंदकिशोर सुथार ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पीबीएम अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद एएनएम स्वयं 108 एम्बुलेंस से गर्भवती और उसके परिजनों के साथ पीबीएम अस्पताल पहुंचीं।
पीबीएम अस्पताल के जनाना वार्ड स्थित कमरा नंबर 107 में प्रसव सखी काउंटर पर पहुंचते ही सुमित्रा का ममता कार्ड एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर तत्काल पंजीकरण किया गया। प्रसव सखी ने बिना किसी विलंब के उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाया, जहां जांच के बाद तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता बताई गई। अगले दो दिनों में सुमित्रा को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया, जिससे उसकी स्वास्थ्य स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
उपचार पूर्ण होने के बाद सुमित्रा 108 एम्बुलेंस से सुरक्षित अपने गांव लौट गई। अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसका नियमित फॉलो-अप किया जा रहा है ताकि अगस्त माह में उसका सुरक्षित प्रसव हो तथा स्वस्थ शिशु का जन्म सुनिश्चित किया जा सके।
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ भवानी शंकर गहलोत ने बताया कि प्रसव सखी योजना, समय पर रेफरल, एम्बुलेंस सेवा तथा मेडिकल कॉलेज स्तर पर त्वरित उपचार का यह समन्वित मॉडल उच्च जोखिम गर्भवतियों के लिए जीवनदायी साबित हो रहा है।
