गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए 15 जुलाई से चलेगा सघन स्क्रीनिंग अभियान

बीकानेर राजस्थान
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बीकानेर, 14 जुलाई। प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए आगामी 15 जुलाई से 5 दिवसीय विशेष स्क्रीनिंग अभियान शुरू होने जा रहा है। इस निर्णय से प्रदेश की प्रत्येक गर्भवती महिला के स्वास्थ्य मानकों की गहन प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) सुनिश्चित की जाएगी और हर रिस्क फैक्टर का रिकॉर्ड संधारित कर उनकी नियमित डिजिटल ट्रैकिंग होगी। इस दूरगामी अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को जयपुर स्वास्थ्य भवन से प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) आयोजित कर विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस में बीकानेर जिले से डीटीओ डॉ चंद्र शेखर मोदी, डिप्टी सीएमएचओ (परिवार कल्याण) डॉ. योगेंद्र तनेजा और आरसीएचओ डॉ. भवानी शंकर गहलोत ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। इसके साथ ही ब्लॉक स्तर से सभी खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ), पीएमओ तथा बीपीओ सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।

 

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लिए बनेगा अलग ट्रैकिंग सिस्टम

इस विशेष अभियान के माध्यम से गर्भावस्था के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पंजीकरण कर सभी सूचनाएं पीसीटीएस पोर्टल पर दर्ज की जाएंगी। प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम चार गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांचें अनिवार्य रूप से की जाएंगी। एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व सिजेरियन और जुड़वां गर्भ जैसी जटिलताओं वाले हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) मामलों के लिए एक विशेष ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

 

लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही, लेबर रूम और ओटी नियमों की पालना सख्त

अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित क्षेत्र के कार्मिकों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सभी स्वास्थ्य संस्थानों में लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर (ओटी) के राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों (एसओपी) की पालना करने, उन्हें समय-समय पर सेनेटाइज करने तथा आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं व रक्त की उपलब्धता को पूर्ण रूप से कार्यशील स्थिति में रखने के निर्देश दिए गए हैं।

 

जिलों में मातृ मृत्यु की घटना का 24 घंटे में होगा प्रारंभिक रिव्यू

सुरक्षित मातृत्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम और निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने निर्देश दिए कि यदि किसी जिले में मातृ मृत्यु की घटना होती है, तो 24 घंटे के भीतर उसका प्रारंभिक विश्लेषण और मैटरनल डेथ रिव्यू किया जाएगा। रेफ़रल मामलों में भी संपूर्ण चिकित्सकीय विवरण भेजना अनिवार्य होगा।