डूंगर महाविद्यालय में डॉ. अमीनुद्दीन की स्मृति में प्रथम स्मृति व्याख्यान आयोजित

बीकानेर राजस्थान
Spread the love
https://https://anushasitvani.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-30-at-2.27.10-PM-1.jpeghttps://anushasitvani.com/wp-content/uploads/2024/06/20240619_101620.png

 

भारतीय संस्कृति की विविधता, समन्वय और ‘विविधता में एकता’ की परंपरा पर हुआ मंथन

 

बीकानेर, 26 अक्टूबर। राजकीय डूंगर महाविद्यालय के प्रताप सभागार में प्रख्यात इतिहासकार प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन की स्मृति में प्रथम स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन फाउंडेशन ट्रस्ट एवं महाविद्यालय के इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान का विषय “अनेक परम्पराएँ, एक समग्रता: भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझना” था।

 

कार्यक्रम में ट्रस्ट की गतिविधियों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व चेयरमैन प्रो. सैयद इनायत अली जैदी तथा डॉ. सुनीता जैदी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

 

मुख्य वक्ता डॉ. शेख मस्तान ने भारतीय संस्कृति की विविधता एवं समन्वय की परंपरा पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति फूलों की माला के समान है, जिसमें प्रत्येक फूल की अपनी विशिष्ट पहचान होती है, लेकिन सभी को जोड़ने वाला धागा एक ही होता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। विभिन्न परंपराओं, भाषाओं और मान्यताओं के बीच समन्वय भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान है।

 

इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन के शैक्षणिक एवं ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1966 से डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभाग को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। वे गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक समन्वय के प्रतीक थे। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व आज भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

 

डॉ. अमीनुद्दीन के पुत्र एवं ट्रस्ट के पदाधिकारी डॉ. इफ़्तेख़ारुद्दीन ने कहा कि यह स्मृति व्याख्यान भारतीय संस्कृति की बहुलतावादी परंपरा, आपसी सौहार्द और विविधता में एकता के संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने कहा कि इस प्रकार के स्मृति व्याख्यान विद्यार्थियों को अपने इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से महाविद्यालय में इस व्याख्यान परंपरा को प्रतिवर्ष जारी रखा जाएगा।

 

कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष  नलिन बुधवार ने अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. नासिर ज़ैदी ने मंच संचालन किया।