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बीकानेर,
प्रधान संपादक 20 अप्रैल।रेगिस्तानी संस्कृति और परंपराओं के प्रतीक बीकानेर शहर का 539वां स्थापना दिवस रविवार को अक्षय तृतीया (आखातीज) के पावन अवसर पर पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, वर्ष 1488 में राव जोधा के पांचवें पुत्र राव बीकाजी ने करणी माता के आशीर्वाद से राती घाटी में इस शहर की स्थापना की थी।
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसी कारण राव बीकाजी ने इस दिन शहर की नींव रखी थी, ताकि बीकानेर सदा समृद्ध और उन्नत बना रहे। स्थापना दिवस के अवसर पर शहर में पारंपरिक कार्यक्रमों की धूम रही।
इस दिन बीकानेर की सबसे खास पहचान पतंगबाजी रही, जिसमें “चंदा” नामक गोल पतंगों ने आसमान को रंग-बिरंगा बना दिया। माना जाता है कि इस विशेष पतंगबाजी की परंपरा 19वीं सदी से चली आ रही है और आज भी उतनी ही लोकप्रिय है।
वहीं, घर-घर में पारंपरिक व्यंजन खीचड़ा और इमली का शरबत बनाया गया, जिसने उत्सव के स्वाद को और खास बना दिया। इसके अलावा, मटकी पूजन कर शहर की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
पूरे शहर में छतों पर लोगों की भीड़, रंग-बिरंगी पतंगें और उत्साह का माहौल देखने को मिला। अक्षय तृतीया का यह पर्व बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
