बीकानेर, 12 जनवरी।
अनुशासित वाणी
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सोमवार को महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में ‘वैश्विक संदर्भों में भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
इसके मुख्य वक्ता संस्कृतिकर्मी डाॅ. राजेश व्यास थे। उन्होंने कहा कि विविध विषयों के संदर्भ में भारतीय ज्ञान अत्यंत समृद्ध है। देश ने यह ज्ञान पूरी दुनिया को दिया है। इसी कारण भारत विश्वगुरु कहलाया। उन्होंने कहा कि कल्हण की राजतरंगिणी हो, चाहे जयदेव का गीतगोविन्द, सभी में भारतीय सभ्यता और संस्कृति से विश्व को परिचित करवाया गया है।
उन्होंने आज के डिजिटल। युग में भारतीय युवा की लिखित साहित्य से बढ़ रही दूरी पर चिंता जताई और कहा कि युवा पीढ़ी इस बात को समझे कि भारतीय ज्ञान परम्परा सिर्फ पाठ्यक्रम का हिस्सा मात्र है। यह जीवनमूल्यों, वैज्ञानिक चेतना और तर्कशीलता की संवाहक है। उन्होंने विभिन्न तर्कों और उदाहरणों से भारतीय ज्ञान परम्परा के बारे में बताया।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता डाॅ. मेघना शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया और विषय प्रवर्तन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को सांस्कृतिक आत्मबोध और राष्ट्रीय पहचान के लिए आवश्यक बताया। डाॅ. मेघना ने मंच से डॉ. राजेश व्यास के कृतित्व की जानकारी दी।
इससे पहले अतिथियों ने स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। योग विभाग के विद्यार्थियों ने योगाभ्यास के माध्यम से आरोग्यता का संदेश दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने युवाओं से स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों के अनुसरण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विवेकानंद के सिद्धांत बेहद प्रासंगिक है। उन्होंने दुनिया को भारतीय ज्ञान से अवगत करवाया। वे वैश्विक स्तर पर भारत को प्रतिष्ठित करना चाहते थे। उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
इस दौरान रामकृष्ण मिशन फाउण्डेशन के अर्जुन सिंह व अयोध्या के सुमधुर शास्त्री ने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. प्रभुदान चारण द्वारा किया गया।
इस दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर, योग विभाग, व स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के संयुक्त तत्वावधान में विद्यार्थियों हेतु रन फाॅर स्वदेशी का आयोजन किया। कार्यक्रम में प्रो. राजाराम चोयल, उमेश शर्मा, डाॅ. अनिल कुमार दुलार, डाॅ. यशवंत गहलोत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन के अंत में देशप्रेम व स्वामी विवेकानंद के संदर्भ में भजनों की प्रस्तुति सुमधुर शास्त्री व ग्रुप द्वारा दी गई।
